समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

Wednesday, December 31, 2008

अखबार मिले तो अखाड़े की खबर पढ़ पायें-व्यंग्य कविता

पुराने बुद्धिजीवियों ने बना लिया
भाषा सम्मेलन को अखाड़ा
होना ही था कबाड़ा
एक ने कहा
‘पुराने विचारों को नये संदर्भ में
देख कर आग बढ़ते जायें
अपनी परंपराओं के सहारे ही
आधुनिक संसार में अपनी भूमिका बनाये’।

दूसरे ने कहा
‘भूल जाओ अपना पुराना ज्ञान
नये ख्याल से जुड़कर करो अभिमान
चलो पश्चिम की राह
भले ही सूरज वहां डूबता हो
पूर्व में हैं पौंगा पंथ
ऐसा ज्ञान भी किस काम का
जिसमें आदमी ऊबता हो
इसलिये हमने बनाये हैं नये देवता
जो गरीबों और कमजोरों के गुण गायें
नारे लगाते और वाद गाते
आप सभी नये भी उसी राह चले जायें।’

नये लोग हैरान और परेशान थे
तभी एक आया और पुराना बुद्धिजीवी
और बोला-
न इसकी सुनो
न उसकी बात गुनो
जहां मन हो वहीं चलते जाओ
नशे में न होश खोना
अपने लिये आगे संकट हो
कभी ऐसे बीज न बोना
आंखें रखना खुली
अपनी अक्ल से अपना बोझा ढोना
एक की राह पर चलकर
पौंगा पंथी बन जाओगे
दूसरे की राह चले
तो पढ़े लिखे गुलाम बनकर
विदेशी बोझा उठाओगे
आजादी से अपनी सांस लेना
कोई और बताये राह
इससे अच्छा है अपने विवेक से चुन लेना
देख कर भी सीखा जाता है बहुत कुछ
जरूरी नहीं है हर बात तुम्हें सिखायें।’

नये युवक खड़े सम्मेंलन के अखाड़े में
शब्दिक युद्ध देख रहे थे
तय नहीं कर पाये कि
‘कहा से चलें और कहां जायें
आखिरं एक सोकर उठे बुद्धिजीवी ने कहा
‘चलो अब सभी घर जायें
हम तो सोते रहे पूरे कार्यक्रम में
यहां क्या हुआ
कल अखबार मिले तो
इस अखाड़े की खबर पढ़ पायें।’

---------------------
यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान- पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिकालेखक संपादक-दीपक भारतदीप

2 comments:

शुभम आर्य said...

आपको एवं आपके समस्त मित्र सबको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऎं| नया वर्ष आप के जीवन में खुशियों की बाढ लाये|

राजीव करूणानिधि said...

naye saal ki badhai deepak ji.

लोकप्रिय पत्रिकायें

विशिष्ट पत्रिकायें

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर