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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

Sunday, October 4, 2015

यह न समझना-हिन्दी कविता(yah na samajhana-HindiKavita)


नहीं लिखते बेअदबी पर
यह न समझना
हमारा कोई ख्याल नहीं है।

नहीं बोलते दर्द देने पर
यह न समझना
हमें कोई मलाल नहीं है।

कहें दीपकबापू मौन से
सब कह जाते हैं
यह न समझना
मुकाबला करने की
हमारे पास कोई चाल नहीं है।
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दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’’
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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