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Wednesday, September 10, 2008

टंकी पर चढ़ने का रिवाज पुराना हो गया-हास्य कविता

टंकी पर चढ़ गया आशिक
यह कहते हुए कि
‘जब तक माशुका शादी के लिये
राजी नहीं होगी
वह नीचे नहीं आयेगा
अधिक देर लगी तो कूद जायेगा’

शोर मच गया चारों तरफ
भीड़ में शामिल माशुका पहले घबड़ायी
और और बोली
‘आ जा नीचे ओ दीवाने
मैंने अपनी शादी का कार्ड भी छपवा लिया है
देख इसे
पर ऐसा तभी होगा, जब तू नीचे आयेगा’

वह दनदनाता नीचे आया
माशुका के हाथ से लिया कार्ड
उसमें दूल्हे की जगह
किसी और का नाम था
आशिक चिल्लाया
‘यह तो धोखा है
मैं चलता हूं फिर ऊपर
अब तो मेरा शव ही नीचे आयेगा‘

वह खड़े लोगों ने उसे पकड़ लिया तो
माशुका ने कहा
‘ऐ आशिक
बहुत हो गया है
इश्क में टंकी पर चढ़कर
वहां से कूदने के नाटक का रिवाज
नहीं चलता आज
चढ़े बहुत हैं ऊपर
पर नीचे कोई नहीं आया
भले ही किसी ने नहीं मनाया
नशा उतर गया तो सभी नीचे आये
कर अब कोई नया ईजाद तरीका
तभी तू अशिकों के इतिहास में
अपना नाम लिखा पायेगा

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2 comments:

venus kesari said...

ही ही ही बड़े पते की बात की आपने
हमें तो ये बात पता ही नही थी :) :)

वीनस केसरी

Udan Tashtari said...

पहले ही बता देते कि रिवाज पुराना हो गया है, तो आशिक मियाँ चढ़ते ही नहीं.. हा हा!!

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