खींचते गये बिना सोचे समझे लकीर पर लकीर
खुद ही नहीं समझे, बन गयी ऐसी एक तस्वीर ?
कागज पर लिखे कई शब्द जो शायरी बन गये
फिर भी तन्हाई का संग रहा,रूठी रही तकदीर
ढूंढ रहे है कोई साथी भटके लोगों की भीड़ में
वफा के वादे झूठे करते, इंसान हो या कोई पीर
यकीन कोई नहीं करता कि हम कभी निभायेंगे
टूटे बिखरे लोगों को दिखाया चाहे अपना दिल चीर
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मत तड़पो किसी की याद में
मिलना बिछड़ना तो दुनियां का कायदा है
जिनके लिये दिल को तकलीफ देते हो
वह भुलाकर कहीं मना रहे जश्न
जान लोग जब यह सच तो
अपने गम पर पछताओगे बाद में
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रोकड़ संकट बढ़ाओ ताकि मुद्रा का सम्मान भी बढ़ सके।
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हम वृंदावन में अनेक संत देखते हैं जो भल...
6 years ago
1 comment:
भावविभोर कर दिया आपने!
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