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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

Thursday, June 26, 2008

समय रहते होश में आओ-हिंदी शायरी

जिंदगी भर ख्वाहिशों की फसल बोते रहे
कुछ पर फल लगे, बाकी पर उम्मीद ढोते रहे
प्यार के लिये की खाली पलों की तलाश
पर हिसाब किताब में जिंदगी खोते रहे
खुशियां किसी पेड़ पर नहीं उगा सके
जिस दिल में रहती हैं उसे जगा नहीं सके
जुबान जो बात कह सकती हैं लफ्जों में
उसको समझाने के लिये दौलत के
आंकड़ों का बनाया जाल
जिसमें फंसकर बस रोते रहे
कहें महाकवि दीपक बापू
बरसता है पानी तभी होती है फसल
लहलहाते खेत जब मेहनत होती असल
नीयत बूरी हो तो खेल बिगड़ जाते
मतलब अपने हमेशा नहीं निकल पाते
प्यार पाने से पहले करना जरूरी है
समय रहते होश में आ जाओ
नहीं तो फिर आयेगा एक दिन वह जब
कहोगे हम अपनी जिंदगी बिना चैन के ढोते रहे
.................................

दीपक भारतदीप

3 comments:

mehek said...

बरसता है पानी तभी होती है फसल
लहलहाते खेत जब मेहनत होती असल
नीयत बूरी हो तो खेल बिगड़ जाते
मतलब अपने हमेशा नहीं निकल पाते
प्यार पाने से पहले करना जरूरी है
समय रहते होश में आ जाओ
नहीं तो फिर आयेगा एक दिन वह जब
कहोगे हम अपनी जिंदगी बिना चैन के ढोते रहे
bahut hi khubsurat baat kahi,badhai.

श्रद्धा जैन said...

बरसता है पानी तभी होती है फसल
लहलहाते खेत जब मेहनत होती असल
नीयत बूरी हो तो खेल बिगड़ जाते
मतलब अपने हमेशा नहीं निकल पाते

aapne ye sabdon main zindgi ka saar rakh diya hai

advocate rashmi saurana said...

प्यार के लिये की खाली पलों की तलाश
पर हिसाब किताब में जिंदगी खोते रहे
bhut sundar. sundar rachana ke liye badhai.

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