मेरी नाकामी पर ताने न मारो
क्योंकि तुम्हारी कामयाबी
किसी को क्या खुशी देगी
जब तुम्हें ही न दे सकी
क्योंकि उसके नीचे कई लोगों की
सिसकी दफन है
तुम्हारे घर बिछे कालीन के नीचे
मरे हुए इंसानों का चुराया कफन है।
बोझिल होकर मुस्कराते हो,
हवा के एक झौंके से डर जाते हो,
मुझसे हमदर्दी जताने वाले, तुम नहीं जानते
ढेर सारे दर्द के साथ जीते हुए
खुलकर हंसना भी एक बहुत बड़ा फन है।
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कवि, लेखक और संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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