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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
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Friday, September 12, 2014

हिन्दी दिवस की बरसात-14 सितम्बर पर विशिष्ट हास्य कविता(hindi diwas ki barsat-A comedy poem on 14 septebar hindi day or hindi divas




हिन्दी दिवस परफंदेबाज ने
कसी फब्तियां और बोला
‘दीपक बापू फ्लाप कवि की
जब तुम्हारी भूमिका देखता हूं
तब तरस आता है,
तुम लिखते हो शब्द
किसी के अर्थ समझ में नहीं आता है,
या तुम पर किसी का ध्यान नहीं होता,
ऐसा लगता है जब तुम लिखते हो,
तब पाठक सो जाता है,
या तुम्हारा शब्द प्रकाशित होते ही
अंतर्जाल की भीड़ में खो जाता है,
न कभी नाम मिला न नामा
14 सितम्बर हर बरस निकल जाता है।’’

सुनकर हंसे दीपक बापू
‘हम निराश नहीं होते,
क्योंकि आशा का बोझ कभी नहीं ढोते,
हिन्दी में सम्मान पाने की चाहत
हमें कभी रही नहीं,
लिखना बन गया धर्म
शब्द बन गये आराध्य देव
इसलिये कभी चाहतों की
पीड़ा कभी सही नहीं,
इस बार भी देखेंगे
हम हिन्दी दिवस पर तमाशा,
इस पर हुए गंभीर प्रवचन
बन जाते हमें लिये व्यंग्य विषय के
सृजन की आशा,
कुछ विद्वान बड़े बन जायेंगे,
कुछ बड़े विद्वान की तरह तन जायेंगे,
सभी आयेंगे मंच पर सीना तानकर,
श्रोता सुनेंगे उनको ज्ञाता मानकर,
गनीमत है अंतर्जाल पर हिन्दी
अधिक नहीं चलती है,
अपनी हर हास्य कविता
चाहे जैसी हो एकांत में मचलती है,
स्थानीय स्तर पर भी
कोई हमारा नाम नहीं जान पाया,
हम प्रसन्न हैं
हमारा हर शब्द वैश्विक स्तर पर छाया,
न मिला न मिलना चाहिये
हमें लेखकीय सम्मान,
हम एकांत साधना की चुके ठान,
देखते हैं हम भी दृष्टा की तरह
अनेक खड़े रहते सम्मान की पंक्ति में
किसी के रहते हाथ रहते खाली
किसी पर हिन्दी दिवस
प्यार से बरस ही जाता है।
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लेखक एवं कवि-दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप,
ग्वालियर मध्यप्रदेश
writer and poet-Deepak raj kukreja "Bharatdeep",Gwalior madhya pradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर  

athor and editor-Deepak  "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com

Sunday, September 8, 2013

एक दिन की महफिल-हिन्दी दिवस पर हास्य व्यंग्य कविता (ek din ki mahafil-hindi diwas par hasya vyangya kavita




हिन्दी दिवस हर बार
यूं ही मनाया जायेगा,
राष्ट्रभाषा का महत्व
अंग्रेजी में बोलेंगे बड़े लोग
कहीं हिंग्लिश में
नेशनल लैंग्वेज का इर्म्पोटेंस
मुस्कराते समझाया जायेगा।
कहें दीपक बापू
पता ही नहीं लगता कि
लोग तुतला कर बोल रहे हैं
या झुंझला कर भाषा का भाव तोल रहे हैं,
हिन्दी लिखने वालों को
बोलना भी सिखाया जायेगा,
हमें तसल्ली है
अंग्रेजी में रोज सजती है महफिलें
14 सितम्बर को हिन्दी के नाम पर
चाय, नाश्ता और शराब का
दौर भी एक दिन चल जायेगा।

लेखक एवं कवि-दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप,
ग्वालियर मध्यप्रदेश
writer and poet-Deepak raj kukreja "Bharatdeep",Gwalior madhya pradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर  

athor and editor-Deepak  "Bharatdeep",Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com

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