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Sunday, May 16, 2010

खौफ के साये में जीने के आदी लोग-हिन्दी शायरी (kauf sa saaye men log-hindi shayari)

तारीफों के पुल अब उनके लिये बांधे जाते हैं,
जिन्होंने दौलत का ताज़ पहन लिया है।
नहीं देखता कोई उनकी तरफ
जिन्होंने ज़माने को संवारने के लिये
करते हुए मेहनत दर्द सहन किया है।
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खौफ के साये में जीने के आदी हो गये लोग,
खतरनाक इंसानों से दोस्ती कर
अपनी हिफाजत करते हैं,
यह अलग बात उन्हीं के हमलों से मरते हैं।
बावजूद इसके
सीधी राह नहीं चलते लोग,
टेढ़ी उंगली से ही घी निकलेगा
इसी सोच पर यकीन करते हैं।
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कवि, लेखक और संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com

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Friday, April 23, 2010

विकास दर और मजदूर-हिन्दी शायरी (vikas dar aur mazdoor-hindi shayari)

चार मजदूर
रास्ते में ठेले पर सरिया लादे
गरमी की दोपहर
तेज धूप में चले जा रहे थे,
पसीने से नहा रहे थे।
ठेले पर नहीं थी पानी से भरी
कोई बोतल
याद आये मुझे अपने पुराने दिन
पर तब इतनी गर्मी नहीं हुआ करती थी
मेरी देह भी इसी तरह
धूप में जलती थी
पर फिर ख्याल आया
देश की बढ़ती विकास दर का
जिसकी खबर अखबार में पढ़ी थी,
जो शायद प्रचार के लिये जड़ी थी,
और अपने पसीने की बूंदों से नहाए
वह मजदूर अपने पैदों तले रौंदे जा रहे थे

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संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://rajlekh.blogspot.com
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Tuesday, December 29, 2009

नववर्ष के दिन-हिन्दी शायरी (hindi shayri on new year first day)

एक वर्ष में दो बार उसके आने का स्वागत करते दिखेंगे।

पहले ईसवी फिर विक्रम संवत् पर जश्न मनते दिखेंगे।

बस एक दिन नयी सोच का वादा,

नये सपनों के साथ जीने का इरादा,

फिर पुरानी राह पर कदम बढ़ते दिखेंगे।

बाजार के सौदागर पुराने जज़्बातों को

रोज नया सजाकर दिखाते हैं,

एक दिन में सब हवा हो जाते हैं,

नये के साथ पुराने सामान भी बिकेंगे।

देर रात को सोकर दोपहर में उठने वाला

क्या जाने हर पल नया होता है,

जब करना है सुबह की बेला में ताज़गी का अहसास

उस समय वह नींद में सोता है

क्यों नहीं पुरानेपन से घबड़ाये लोग

नये वर्ष में ताजगी लेने के लिये

हुजूम में जुटेंगे,

दुःख से नहीं बल्कि खुशी से लुटेंगे,

बाजार के कलमकार भी

पुराने अहसासों को नये शब्दों में लिखेंगे।

पूरे वर्ष ताजगी और चैन की चाहत लिये लोग

एक दिन में पुराने होते दिखेंगे।



कवि, लेखक और संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com

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